घी खाने के फायदे

आयुर्वेद मे घी को औसधी मानते है | घी को सात्विक आहार माना गया है और सर्व दोषो मे ये फायदेमंद है | ये तीनो वात, पीत और कफ को संतुलित करता है | घी खाने से आरोग्यवर्धक फेट प्राप्त होती है, ये लिवर और रोग प्रतिकारक व्यवस्था को संतुलित रखने के लिए बहोत ज़रुरू है | बाज़ार मे मिलने वाले घी से घरे मे बनाया घी बेहतर माना जाता है | 

घी का स्मोकिंग पाइंट दूसरी सभी फेट की तुलना में काफ़ी अधिक होता है और इसी वजह से जब घी को गर्म करते है तो वो आसानी से नही जलता । घी मे सॅचुरेटेड बॉंड्स काफ़ी स्थिर होते है और इसी वजह से फ्री रॅडिकल्स निकलने की संभावना बहोत कम होती है ।

घी खाने के फायदे

तो आइए देखते है घी खाने के फायदे

कम कोलेस्ट्रॉल

घी पर किए गये संशोधन से पता लगता है की इससे रक्त और आँतों में रहा कोलेस्ट्राल कम होता है | घी पेट और मस्तिष्क के लिए श्रेष्ट ओषधि माना गया है । घी से आँखों पर पड़ने वाला प्रेशर कम होता है , इसी वजह से ग्लूकोमा के मरीजों के लिए भी गुणकारी है ।  घी पेट मे मौजूद एसिड्स के बहाव को बढाने का काम करता है जिससे पाचन क्रिया मजबूत हो जाती है | बाकी की कोई फेट मे यह गुण नहीं पाया जाता है । तेल, मक्खन आदि पाचन क्रिया को मंद करते है और पेट में निष्क्रिय जमा हो जाते है ।  घी में बेहद मात्रा मे एंटी आक्सीडेट्स पाए जाते है और ये अन्य खुराक और खाध्य पदार्थों मे रहे विटामिन और खनिजों को जज्ब करने में मदद करता है ।

घी रोग प्रतिकारक व्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है । घी में ब्यूटिरिक एसिड नामका फैटी एसिड भरपूर होता है और इसी वजह से घी एंटीवायरल भी माना जाता है । इसी एंटीवायरल खुबीओ के कारण कॅन्सर की गाँठ की वृद्दि रूक जाती है । जलन से हुए फोड़ो मे घी बहुत अच्छा काम करता है । घी यादशक्ति को तेज करने मे मदद करता है और इसी वजह से सीखने की प्रवृति विकसित होती है । पर आप ये ध्यान रखे की जिनका कोलेस्ट्रॉल पहले से अधिक है उन्हे परहेज रखना बेह्द ज़रूरी है |

घी खाएं या नहीं

यदि आप कोलोस्ट्रॉल कम है और स्वास्थ्य है, तो घी जरूर खाएं, क्योंकी मक्खन से तो ये अधिक सुरक्षित है । और घी में तेल से अधिक पोषक तत्व होते है। आपने पंजाब और हरियाणा मे देखा होगा की वे टनों घी खाते है, लेकिन सबसे अधिक फिट और मजबूत होते है । आयुर्वेद मे पहले से ही घी का अल्सर, कब्ज, आँखों की बीमारियों के साथ त्वचा रोगों के इलाज मे उपयोग किया जाता है |

क्या रखें सावधानियां

गाय के दूध मे भैंस के दूध के मुक़ाबले फेट की मात्रा कम होती है | घी हमेशा उतना ही बनाए जितना ज़रूरी हो और जल्दी ख़तम हो जाए | ताकि आप नया घी दूसरे हफ्ते मे फिर बना सके और घी ताज़ा रहे | गाय के दूध मे बाहरी प्रदूषण का असर हो सकता है, जैसे की कीटनाशक और कुत्रिम खाद गाय के पेट मे जा सकते है | इसलिए बाइयोलॉजिकल घी बनाकर इस तरह के प्रदूषण से बचा जा सकता है | और अगर हो सके तो गाय के दूध मे मौजूद कीटनाशक और कुत्रिम खाद के अंश की जाँच करा शकते है | जैसे किसी भी चीज़ अति बुरी होती है इसी तरह घी को भी संतुलित मात्रा मे यूज़ करना चाहिए |

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